Tuesday, July 9, 2019

उल्लू और चमगादड़ व विनम्रता

प्रेरक प्रसंग 3 – ‘उल्लू और चमगादड़’

किसी बस्ती में एक उल्लू रहता था। उसकी बोली लोग बड़ी अशुभ समझते थे। इसीलिए कोई भी उसे अपने पास न आने देता था। जैसे ही वह बोलता, लोग उसे भगा देते थे।
बस्ती वालों के इस व्यवहार से उल्लू बड़ा दुखी रहने लगा। एक दिन वह अपनी सहेली चमगादड़ से बोला – “बहिन, मेरी आवाज कोई सुनना नहीं पसंद करता। लोगों के इस व्यवहार से मुझे बड़ा दुःख होता है। मैं यह स्थान छोड़कर जा रहा हूँ।
चमगादड़ उसे समझाते हुए कहने लगी – “मित्र, परिस्थितियाँ तो सब जगह एकसी ही हैं। अपनी आवाज के कारण तो तुम जहाँ भी जाओगे, तिरस्कार पाओगे। अच्छा तो यही है कि तुम लोगों की निंदा से प्रभावित न होओ। तुम अपनी चिंतन को संतुलित रखो। सद्गुणों को अपनाओ। यही सुखी और सफल जीवन का रहस्य है।”
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प्रेरक प्रसंग 4 – ‘विनम्रता’

डॉ. महेन्द्रनाथ सरकार कलकत्ता (कोलकाता) के एक बहुत प्रसिद्ध और धनि डॉक्टर थे। एक बार वे सुप्रसिद्ध संत श्री रामकृष्ण परमहंस से मिलने गए। उस समय परमहंस जी बगीचे में टहल रहे थे। वे इतने सीधे और सादगी से भरे थे कि डॉ. सरकार ने उन्हें माली समझा।
सरकार ने आवाज लगाकर कहा – “ऐ माली ! थोड़े से फूल तो लाकर दे। परमहंस जी को भेंट करने हैं।”
परमहंस जी ने तुरंत ही अच्छे – अच्छे फूल तोड़कर उन्हें दे दिए।
थोड़ी देर बाद सत्संग शुरू हुआ। डॉ. सरकार लज्जा से भर गए। जिसे उन्होंने माली समझा था, वे तो स्वयं परमहंस जी ही थे। उनकी इस विनम्रता से डॉ. सरकार आश्चर्यचकित रह गए।
विनम्रता कहानी से सीख Moral of Story on Vinamrata :  इस शिक्षाप्रद कहानी से सीख मिलती है कि विनम्रता एक कीमती आभूषण है। यह एक बहुत बड़ा सद्गुण है। यह गुण मानव को महामानव बनाता है।

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