Sunday, July 28, 2019

सकारात्मक सोच का महत्व


आज का प्रेरक प्रसंग
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सकारात्मक सोच का महत्व

एक व्यक्ति ऑटो से रेलवे स्टेशन जा रहा था। ऑटो वाला बड़े आराम से ऑटो चला रहा था। एक कार अचानक ही पार्किंग से निकलकर रोड पर आ गई। ऑटो ड्राइवर ने तेजी से ब्रेक लगाया और कार, ऑटो से टकराते-टकराते बची।

कार चला रहा आदमी गुस्से में ऑटोवाले को ही भला-बुरा कहने लगा जबकि गलती उसकी थी! ऑटो चालक एक सत्संगी (सकारात्मक विचार सुनने-सुनाने वाला) था। उसने कार वाले की बातों पर गुस्सा नहीं किया और क्षमा माँगते हुए आगे बढ़ गया।

ऑटो में बैठे व्यक्ति को कार वाले की हरकत पर गुस्सा आ रहा था और उसने ऑटो वाले से पूछा... तुमने उस कार वाले को बिना कुछ कहे ऐसे ही क्यों जाने दिया।उसने तुम्हें भला-बुरा कहा जबकि गलती तो उसकी थी।

हमारी किस्मत अच्छी है.... नहीं तो उसकी वजह से हम अभी अस्पताल में होते।

ऑटो वाले ने बहोत मार्मिक जवाब दिया...... "साहब,. बहुत से लोग गार्बेज ट्रक (कूड़े का ट्रक) की तरह होते हैं। वे बहुत सारा कूड़ा अपने दिमाग में भरे हुए चलते हैं।......

जिन चीजों की जीवन में कोई ज़रूरत नहीं होती उनको मेहनत करके जोड़ते रहते हैं जैसे.... क्रोध, घृणा, चिंता, निराशा आदि। जब उनके दिमाग में इनका कूड़ा बहुत अधिक हो जाता है.... तो, वे *अपना बोझ हल्का करने के लिए इसे दूसरों पर फेंकने का मौका ढूँढ़ने लगते हैं।

इसलिए .....मैं ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखता हूँ और उन्हें दूर से ही मुस्कराकर अलविदा कह देता हूँ। क्योंकि ....अगर उन जैसे लोगों द्वारा गिराया हुआ कूड़ा मैंने स्वीकार कर लिया..... तो, मैं भी कूड़े का ट्रक बन जाऊँगा और अपने साथ-साथ आसपास के लोगों पर भी वह कूड़ा गिराता रहूँगा।

मैं सोचता हूँ जिंदगी बहुत ख़ूबसूरत है इसलिए...... जो हमसे अच्छा व्यवहार करते हैं उन्हें धन्यवाद कहो और जो हमसे अच्छा व्यवहार नहीं करते उन्हें मुस्कुराकर भुला दो।

हमें यह याद रखना चाहिए कि सभी मानसिक रोगी केवल अस्पताल में ही नहीं रहते हैं....... कुछ हमारे आसपास खुले में भी घूमते रहते हैं!

प्रकृति के नियम:-

यदि खेत में बीज न डाले जाएँ..... तो, कुदरत उसे घास-फूस से भर देती है।

उसी तरह से...... यदि दिमाग में सकारात्मक विचार न भरें जाएँ तो नकारात्मक विचार अपनी जगह बना ही लेते हैं।

दूसरा नियम है कि

जिसके पास जो होता है वह वही बाँटता है।....... “सुखी” सुख बाँटता है, “दुखी” दुख बाँटता है, “ज्ञानी” ज्ञान बाँटता है," "भ्रमित भ्रम बाँटता है" और.... “भयभीत” भय बाँटता है। जो खुद डरा हुआ है वह, औरों को डराता है, दबा हुआ दबाता है, चमका हुआ चमकाता है।

इसलिए.... नकारात्मक लोगों से दूरी बनाकर खुद को नकारात्मकता से दूर रख्खें। और जीवन में सकारात्मकता अपनाएं

Wednesday, July 10, 2019

चरित्र

     चरित्र

नेल्सन मंडेला दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति बनने के बाद, अपने सुरक्षा कर्मियों के साथ एक रेस्तरां में खाना खाने गए । सबने अपनी अपनी पसंद के खाना का आर्डर दिया और खाना के आने का इंतजार करने लगे ।
उसी समय मंडेला की सीट के सामने एक व्यक्ति भी अपने खाने आने का इंतजार कर रहा था । मंडेला ने अपने सुरक्षा कर्मी को कहा उसे भी अपनी टेबल पर बुला लो । ऐसा ही हुआ, खाना आने के बाद सभी खाने लगे,  वो आदमी भी अपना खाना खाने लगा, पर उसके हाथ खाते हुए कांप रहे थे।

खाना खत्म कर वो आदमी सिर झुका कर होटल से निकल गया । उस आदमी के खाना खा के जाने के बाद मंडेला के सुरक्षा अधिकारी ने मंडेला से कहा कि वो व्यक्ति शायद बहुत बीमार था, खाते वक़्त उसकी हाथ लगातार कांप रहे थे और वह कांप भी रहा था ।
मंडेला ने कहा नहीं  ऐसा नहीं है ।वह उस जेल का जेलर था, जिसमें मुझे रखा गया था । कभी मुझे जब यातनाएं दी जाती और मै कराहते हुवे पानी मांगता तो ये मेरे ऊपर पेशाब करता था ।

मंडेला ने कहा  मै अब राष्ट्रपति बन गया हूं, उसने समझा कि मै भी उसके साथ ऐसा ही व्यवहार करूंगा । पर मेरा यह चरित्र नहीं है । मुझे लगता है बदले की भावना से काम करना विनाश की ओर ले जाता है । वहीं धैर्य और सहिष्णुता की मानसिकता हमें विकास की ओर ले जाती है

दान का फल

प्रेरक प्रसंग
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दान का फल!!!!!

दान भी दुःख और भोग का कारण बन सकता हैं।दान देने से पहले जरा सोच लें ?* दान करना हमारे समाज में अति शुभ माना गया है। लेकिन कई बार यह दान दुःख का कारण भी बन जाता है।

हमारे आसपास ऐसे कई व्यक्ति है जो कि ज्यादा दान या ज्यादा धर्म में लीन रहते है। फिर भी कष्ट उनका व उनके परिवार का पीछा नहीं छोड़ता तब हम अपने को सांत्वना स्वरूप यह कह कर संतोष करते है कि भगवान शायद हमारी परीक्षा ले रहा है।

अरे भाई भगवान् कोई तुम्हारी परीक्षा-वरीक्षा नही ले रहा, बल्कि वो तो तुम्हारे ही कर्मो का फल तुम्हे दे रहा है। बहुत दान धर्म करने के बाद भी सुख नही मिलता क्योकि तुम्हारे द्वारा दिया दान ही दुःख का कारण बन जाता है।

एक समय की बात है। एक बार एक गरीब आदमी एक सेठ के पास जाता है और भोजन के लिए सहायता मांगता है।

सेठ बहुत धर्मात्मा होता है वो उसे पैसे देता है। पैसे लेकर व्यक्ति भोजन करता है, और उसके पास कुछ पैसे बचते है जिससे वो शराब पी लेता है शराब पीकर घर जाता है और अपनी पत्नी को मारता है।पत्नी दुखी होकर अपने दो बच्चो के साथ तालाब में कूद कर आत्म हत्या कर लेती है। कुछ समय बाद उस सेठ की भी असाध्य रोग से मृत्यु हो जाती है मरने के बाद सेठ जब ऊपर जाता है तब यमराज बोलते है कि इसको नरक में फेंक दो।

सेठ यह सुनकर यमराज से कहता है कि आपसे गलती हुई है, मैने तो कभी कोई पाप भी नही किया है, बल्कि जब भी कोई मेरे पास आया है मेने उसकी हमेशा मदद ही की है। इसलिये मुझे एक बार भगवान् से मिला दो। तब यमराज उसे बोलते है कि हमारे यहाँ तो गलती की कोई संभावना नही है, गलतिया तो तुम लोग ही करते हो। पर सेठ के बहुत कहने पर यमराज उसे भगवान् के समक्ष पेश करते है।

भगवान् के सामने जाकर सेठ बोलता हे प्रभु मैने तो कोई पाप किया ही नही है तो मुझे नरक क्यों दिया जा रहा है। तब भगवान् उसे उस गरीब व्यक्ति को पैसे देने वाली बात बताते है कि उस व्यक्ति की पत्नी और दो बच्चो की जीव हत्या का कारण तू है।

तू उसे पैसे न देता तो वो शराब पीकर अपनी पत्नी को दुःख नही देता। सेठ बोलता है प्रभु मेने तो एक गरीब को दान दिया है और शास्त्रों में भी दान देने की बात लिखी है। तब भगवान् ने कहा कि दान देने से पहले *पात्र की योग्यता* तो परखनी चाहिए की वो दान लेने के योग्य है या नहीं, या उसे *किस प्रकार के दान* की जरुरत है। तुमने धन देकर उसकी मदद क्यों की, तुम उसको भोजन भी करा सकते थे।

और रही बात उसकी दरिद्रता की तो उसे देना होता तो मैं ही दे देता, वो जिस योग्य था उतना मैने उसे दिया, जब मैने ही उसकी अयोग्यता के कारण उससे सब कुछ नही दिया तो तुम्हे उसे क्या जरुरत थी धन देने की, तुम उसे भोजन भी करवा सकते थे। और तुम्हारे दिये हुए धन-दान के कारण तीन जीव हत्याए हुई है और इन हत्याओ के पाप का फल अब तुम्हे भुगतना पड़ेगा।

Tuesday, July 9, 2019

समय के महत्व पर गांधी जी की 4 बेहतरीन कहानियां




Importance of Time
HINDI KAHANI HINDI STORIES

समय के महत्व पर गांधी जी की 4 बेहतरीन कहानियां (Story On Importance Of Time In Hindi)


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गांधी जी समय के बहुत पापंद थे | वे एक एक क्षण की कीमत भली – भांति जानते थे | इसलिए समय के महत्व को समझने के लिए गांधी जी से अच्छा उदाहरण और कुछ नहीं हो सकता –

समय के मूल्य पर अच्छी कहानी / Story 1

बात उस समय की है जब मोहनदास करमचंद गाँधी सातवीं कक्षा में पढ़ते थे | स्कूल के प्रधान अध्यापक दोरबजी एदुलजी गिमी थे | वह बहुत अनुशासन प्रिय थे और उन्होंने ऊँची के विधार्थियों के लिए व्यायाम, खेल – कूद और क्रिकेट अनिवार्य कर रखा था | मोहनदास को व्यायाम और खेल –कूद में बिल्कुल दिलचस्पी नहीं थी और वे किसी में भाग नहीं लेते थे |
मोहनदास स्कूल से सीधे घर भागते थे क्योंकि उन्हें अपने पिता की सेवा-सुशुश्रा करनी होती थी | अगर वे स्कूल में पढाई के बाद खेल – कूद के लिए रुकते तो समय से अपने पिता की सेवा-सुशुश्रा के लिए घर नहीं पहुँच पाते | मोहनदास ने प्रधान अध्यापक से इस कारण खेल – कूद में भाग लेने से छूट मांगी |
उनकी यह प्रार्थना स्वीकार नहीं की गयी | एक शनिवार को जब स्कूल प्रात: लगा, खेल – कूद के लिए मोहनदास को दुबारा 4 बजे सायंकाल स्कूल जाना था | मोहनदास के पास घड़ी नहीं थी, आसमान में बादल छाए हुए थे | ठीक समय का उन्हें पता नहीं चला | जब बालक स्कूल पहुंचा, सभी लड़के वापस जा चुके थे |
दूसरे दिन प्रधान अध्यापक ने मोहनदास से खेल – कूद में गैर – हाजिर होने का कारण पूछा | यद्यपि मोहनदास ने सही सही कारण बता दिया तो भी प्रधान अध्यापक ने विश्वास नहीं किया और झूठ बोलने के लिए उन पर एक – दो आने का जुर्माना कर दिया |
बालक को बड़ी मार्मिक पीड़ा पहुंची कि उनके प्रधान अध्यापक ने उन्हें झूठा समझा | बाद में मोहनदास के पिता द्वारा पत्र लिखे जाने पर कि मोहनदास स्कूल शाम को गया था और घड़ी न होने की वजह से ठीक समय का पता नहीं चल पाया था, जुर्माना माफ़ कर दिया गया | बालक ने तब समझा कि सच बोलने के साथ साथ समय – पाबन्दी भी आवश्यक है | और तब से उस बालक ने समय की पाबन्दी के मामले में कभी चूक नहीं की |
कहानी से शिक्षा  – समय की पाबन्दी उतनी ही आवश्यक है जितना कि सत्य – मापण | बच्चों , यदि तुम समय पाबन्दी के महत्त्व को समझोगे तो कभी भी किसी गलत – फहमी  का शिकार न होगे |

समय के मूल्य पर प्रेरणादायक कहानी / Story 2

बापू समय के बहुत पाबंद थे | अपना प्रत्येक कार्य समय से करते थे | उनके कार्यक्रम इतने नियमित थे कि उनके आश्रम के लोग उनके कार्यक्रम को देखकर ठीक ठीक समय बता सकते थे और अपनी घड़ियाँ मिला सकते थे |
प्रार्थना के पहले बापू के घूमने का कार्यक्रम रहता था | एक दिन बापू गुजरात विद्यापीठ गये | वहां उन्हें बहुत देर हो गयी | प्रार्थना का समय निकट आ रहा था | उन्होंने देखा कि सामने एक साइकिल पड़ी है | उसे उन्होंने तुरंत उठाया और तेजी से चलाकर ठीक समय पर वे प्रार्थना स्थान पर  पहुँच गए |

समय के मूल्य पर शिक्षाप्रद कहानी / Story 3

बापू के शिष्यों को एक दिन समाचार मिला कि अगले दिन बापू सेवाग्राम आ रहे है | अचानक उस दिन बादल घिर आए और बहुत तेज वर्षा होने लगी | शिष्यों ने समझा कि बापू नहीं आएंगे | कोई व्यक्ति स्टेशन नहीं गया |
कुछ देर बाद लोगो ने क्या देखा कि बापू भीगते हुए पैदल आ रहे है | लोगों के आश्चर्य का कोई ठिकाना नहीं रहा |
बापू ने कहा कि कोई थोड़ी सी वर्षा से डर कर मैं आना क्यों रोक देता |

समय के मूल्य पर प्रेरक कहानी / Story 4

बापू से जो भी लोग मिलने आते थे, उन्हें निश्चित समय दिया जाता था | यदि कोई व्यक्ति उस नियत समय से अधिक समय लेने का प्रयास करता तो बापू तुरंत उसे अपनी घड़ी दिखाकर मुलाकात का समय खत्म हो जाने की सूचना दे देते थे | सुप्रसिद्ध अमेरिकी पत्रकार लुई फिशर को भी एक बार इसी प्रकार बापू जी ने घड़ी दिखाकर मुलाकात का समय समाप्त हो जाने की सूचना दी थी |
यहाँ तक कि बापू जी बोलते समय सैदव अपनी घड़ी सामने रखते थे |

समय का महत्व की कहानी से सीख Moral of The Hindi Stories on Importance of Time

बच्चों, समय पाबन्दी का बड़ा महत्त्व है, सभी काम नियत समय पर किये जाने चाहिए | इससे कोई भी समय बेकार नहीं जाता और समय का सदुपयोग होता है | साथ ही, दूसरों के भी समय का अपव्यय नहीं होता | समय के मूल्य को समझने के लिए समय की पाबन्दी अत्यावश्यक है |

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उल्लू और चमगादड़ व विनम्रता

प्रेरक प्रसंग 3 – ‘उल्लू और चमगादड़’

किसी बस्ती में एक उल्लू रहता था। उसकी बोली लोग बड़ी अशुभ समझते थे। इसीलिए कोई भी उसे अपने पास न आने देता था। जैसे ही वह बोलता, लोग उसे भगा देते थे।
बस्ती वालों के इस व्यवहार से उल्लू बड़ा दुखी रहने लगा। एक दिन वह अपनी सहेली चमगादड़ से बोला – “बहिन, मेरी आवाज कोई सुनना नहीं पसंद करता। लोगों के इस व्यवहार से मुझे बड़ा दुःख होता है। मैं यह स्थान छोड़कर जा रहा हूँ।
चमगादड़ उसे समझाते हुए कहने लगी – “मित्र, परिस्थितियाँ तो सब जगह एकसी ही हैं। अपनी आवाज के कारण तो तुम जहाँ भी जाओगे, तिरस्कार पाओगे। अच्छा तो यही है कि तुम लोगों की निंदा से प्रभावित न होओ। तुम अपनी चिंतन को संतुलित रखो। सद्गुणों को अपनाओ। यही सुखी और सफल जीवन का रहस्य है।”
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प्रेरक प्रसंग 4 – ‘विनम्रता’

डॉ. महेन्द्रनाथ सरकार कलकत्ता (कोलकाता) के एक बहुत प्रसिद्ध और धनि डॉक्टर थे। एक बार वे सुप्रसिद्ध संत श्री रामकृष्ण परमहंस से मिलने गए। उस समय परमहंस जी बगीचे में टहल रहे थे। वे इतने सीधे और सादगी से भरे थे कि डॉ. सरकार ने उन्हें माली समझा।
सरकार ने आवाज लगाकर कहा – “ऐ माली ! थोड़े से फूल तो लाकर दे। परमहंस जी को भेंट करने हैं।”
परमहंस जी ने तुरंत ही अच्छे – अच्छे फूल तोड़कर उन्हें दे दिए।
थोड़ी देर बाद सत्संग शुरू हुआ। डॉ. सरकार लज्जा से भर गए। जिसे उन्होंने माली समझा था, वे तो स्वयं परमहंस जी ही थे। उनकी इस विनम्रता से डॉ. सरकार आश्चर्यचकित रह गए।
विनम्रता कहानी से सीख Moral of Story on Vinamrata :  इस शिक्षाप्रद कहानी से सीख मिलती है कि विनम्रता एक कीमती आभूषण है। यह एक बहुत बड़ा सद्गुण है। यह गुण मानव को महामानव बनाता है।

कर्तव्य

प्रेरक प्रसंग 2 – ‘कर्तव्य’

एक समय की बात है | एक नदी में एक महात्मा स्नान कर रहे थे | तभी एक बिच्छू जो पानी में डूब रहा था, उसे बचाते हुए बिच्छु ने महात्मा को डंक मार दिया |
महात्मा ने उसे कई बार बचाने की कोशिश की | बिच्छू ने उन्हें बार – बार डंक मारा | अंतत: महात्मा ने उसे बचाकर नदी के किनारे रख दिया | थोड़ी दूर खड़े यह सब महात्मा के शिष्य देख रहे थे | जैसे ही वे नदी से बाहर आये तो शिष्यों ने पूछा कि जब वह बिच्छू आपको बार – बार डंक मार रहा था तो आपको उसे बचाने की क्या आवश्यकता थी |
तब महात्मा ने कहा – बिच्छू एक छोटा जीव है, उसका कर्म काटना है, जब वह अपना कर्तव्य नहीं भूला, तो मैं मनुष्य हूँ मेरा कर्तव्य दया करना है तो मैं अपना कर्तव्य कैसे भूल सकता हूँ |
कर्तव्य की कहानी से सीख Moral Of Kartvya Ki Kahani : इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि मार्ग कितना भी कठिन क्यों न हों | मनुष्य को कभी अपना कर्तव्य नहीं भूलना चाहिए |

संगत का असर



छोटे शिक्षाप्रद प्रेरक प्रसंग – Short Shikshaprad Prerak Prasang 

Prerak Prasang in hindi
Prerak Prasang in hindi

विद्यार्थियों के लिए लघु नैतिक इंस्पायरिंग प्रेरक प्रसंग – Short Motivational (Prerak Prasang) Story With Moral Value

प्रेरक प्रसंग 1 – ‘संगत का असर’

एक अध्यापक अपने शिष्यों के साथ घूमने जा रहे थे | रास्ते में वे अपने शिष्यों के अच्छी संगत की महिमा समझा रहे थे | लेकिन शिष्य इसे समझ नहीं पा रहे थे | तभी अध्यापक ने फूलों से भरा एक गुलाब का पौधा देखा | उन्होंने एक शिष्य को उस पौधे के नीचे से तत्काल एक मिट्टी का ढेला उठाकर ले आने को  कहा |
जब शिष्य ढेला उठा लाया तो अध्यापक बोले – “ इसे अब सूंघो |”
शिष्य ने ढेला सूंघा और बोला – “ गुरु जी इसमें से तो गुलाब की बड़ी अच्छी खुशबू आ रही है |”
तब अध्यापक बोले – “ बच्चो ! जानते हो इस मिट्टी में यह मनमोहक महक कैसे आई ? दरअसल इस मिट्टी पर गुलाब के फूल, टूट टूटकर गिरते रहते हैं, तो मिट्टी में भी गुलाब की महक आने लगी है जो की ये असर संगत का है और जिस प्रकार गुलाब की पंखुड़ियों की संगति के कारण इस मिट्टी में से गुलाब की महक आने लगी उसी प्रकार जो व्यक्ति जैसी संगत में रहता है उसमें वैसे ही गुणदोष आ जाते हैं |
संगति का असर कहानी से सीख Moral of Story on Sangati Ka Asar  :  इस शिक्षाप्रद कहानी से सीख मिलती है कि हमें सदैव अपनी संगत अच्छी रखनी चाहिए |